राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद के उद्देश्य:


1. ज्योतिष व इससे सम्बंधित विज्ञान के प्रति व्याप्त भ्रम को दूर करने का प्रयास करना।


2.ज्योतिष व अध्यात्म विद्याओं का प्रचार प्रसार करना। सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करना।


3. ज्योतिष और इससे संबंधित विद्याओं के प्रचार प्रसार हेतु शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना और इसके सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करना।


4. ज्योतिष व उससे संबंधित समस्त विज्ञान के पाठ्यक्रम निर्धारित कर देश के प्रत्येक नगर में उनके शिक्षण की व्यवस्था करना।


5. जन सामान्य के हितार्थ सरल भाषा में पंचांग प्रकाशित करना। ग्रंथों, पुस्तकों, पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन करना और प्राचीन ग्रंथों के डिजिटल संस्करण तैयार करना।


6.सनातन विद्याओं के शोध के लिए जन सामान्य को प्रोत्साहित करना और शोध व्यवस्था करना।


7. अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, नगर स्तर पर ज्योतिष की कार्यशालाओं, सम्मेलनों, शिविरों, प्रवचनों और सभाओं आदि का आयोजन करना।


8. ज्योतिर्विज्ञान की प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियां और ग्रंथों व पुस्तकों का संरक्षण करना एवं उन्हें डिज़िटल प्रारूप में शोधार्थियों को उपलब्ध कराना।


9. ज्योतिष का प्रचार प्रसार करने के लिए परंपरागत ज्योतिष के साथ साथ आधुनिक प्रकार के शिक्षण हेतु ज्योतिष पोर्टल की स्थापना और विद्यालयों, कक्षाओं, महाविद्यालयों, वेदशालाओं, गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों की स्थापना करना।

केवल आवेदन मात्र से सदस्यता सुनिश्चित नहीं है। परिषद् इस विषय में आपको शीघ्र सूचित करेगी।
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